New Delhi : विधायक निर्वाचित होने से पहले भाजपा नेता अनिल पाराशर पर हुए हमले के मुकदमे में बहुप्रतिक्षित फैसला आ गया। बारह वर्ष पुराने मुकदमे में सत्र न्यायालय से हमले की साजिश रचने वाले रिश्तेदार और भाड़े के दोनों शूटर बरी कर दिए गए। अदालत ने पुलिस की कहानी व साक्ष्यों के मिलान न खाने पर यह फैसला सुनाया है।ये घटना पांच अगस्त 2012 की शाम है। उस समय तक वरिष्ठ भाजपा नेता व भाजयुमो के पूर्व महानगर अध्यक्ष के रूप में पहचान रखने वाले अनिल पाराशर निवासी साईं वाटिका रमेश निवास ने क्वार्सी में मुकदमा दर्ज कराया था कि वे अपने श्रीराम गेस्ट हाउस स्थित पुराने आवास से साईं वाटिका आवास जा रहे थे तभी प्रोफेसर कॉलेनी व ज्योति टैंट हाउस के पास बराबर आए बाइक सवार दो युवकों ने उन्हें गोली मारी, जो कान को छूते हुए निकली और चेहरे पर छर्रे लगे। हमले के बाद बाइक सवार रमेश विहार की ओर भाग गए। यह मुकदमा अज्ञात लोगों पर दर्ज कर पुलिस विवेचना हुई। जिसमें 29 सितंबर को पुलिस ने विवेचना के आधार पर तीनों आरोपी मनीष, अशोक उर्फ कालिया व जितेंद्र उर्फ पिंकू को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया। तीनों पर आरोप था कि मनीष मुकदमा वादी अनिल पाराशर का रिश्तेदार है। वह काफी समय से उनके पास रहा। बाद में एक अपराध में जेल चला गया। जब वह जेल से छूटकर आया और फिर रिश्तेदार उसे उनके पास लाए कि अब यह सुधर जाएगा। इस दौरान 2009 में मनीष ने अनिल पाराशर से साढ़े पांच लाख रुपये व उनके साले से तीन लाख रुपये व्यापार करने के लिए उधार लिए। इसके बाद रकम वापस न करने की नीयत से मनीष ने ये साजिश रची और हमला कराया। हमला कराने से पहले माह जुलाई में अनिल पाराशर के ताऊ के देहांत पर शोक जातने आते समय वह उन दोनों को लेकर आया। इसके बाद एक दिन सिक्योरिटी गार्ड का काम दिलाने के बहाने लेकर आया था। इस दौरान उसने हमलावरों को अनिल पाराशर का चेहरा दिखाया था। इसी आधार पर तीनों पर चार्जशीट दायर की गई। न्यायालय में चले सत्र परीक्षण के दौरान साक्ष्यों व पुलिस कहानी से आरोप तय नहीं हो सके। मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता दुर्गेश गौतम, नीरज चौहान व विपिन सिंह राना ने तीनों आरोपियों की ओर से अलग अलग पैरवी की। अधिवक्ता दुर्गेश गौतम व नीरज चौहान के अनुसार अदालत में उन्होंने अपने तथ्य दखे, जिसके आधार पर तीनों को बरी कर दिया गया।वही बरी हुए मनीष पचौरी ने बताया कि वह मूल रूप से जलेसर एटा का रहने वाले है। और बताया कि वह अनिल पाराशर के मामा के साढू के बड़े भाई का लड़का हूं। वह शुरुआत से अनिल पाराशर के पास रहा। उन्होंने 2004 में शादी कराई। उसके बाद उसे अलग कर दिया। 2006 में एक अपराध में जेल जाने के बाद उससे दूरी बनाई। मगर बाद में रिश्तेदारों ने मिलवाया और मदद को रुपये दिलाए।उक्त मामले मैं मुझे बारह वर्ष पहले झूठा फंसाया गया था। आज अदालत से मुझे न्याय मिला है। इसका बेसब्री से इंतजार था। फैसला स्वागत योग्य है।