New Delhi : दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के बाद अब पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश में अपने ग्राफ को बढ़ाने के लिए नए समीकरण साधने की कोशिश में जुटी है। अकाली दल और भाजपा के 23 साल पुराने गठबंधन के टूटने का फायदा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को हुआ था, लेकिन अब गठबंधन की संभावनाएं फिर से चर्चा में हैं। किसान आंदोलन के चलते अलग हुए भाजपा-अकाली को नुकसान झेलना पड़ा, लेकिन भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 18.5% वोट शेयर हासिल कर अपनी स्थिति मजबूत की, जबकि अकाली दल का वोट प्रतिशत लगातार गिर रहा है। इधर, कांग्रेस मजबूत विपक्ष के रूप में उभर रही है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में पार्टी दोबारा मजबूती पाने की कोशिश कर रही है। वहीं, खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह ने अपनी नई पार्टी का ऐलान कर सियासी समीकरणों को और उलझा दिया है।