New Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अचानक लाहौर यात्रा ने सबको चौंका दिया था। यह यात्रा न सिर्फ भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक अनपेक्षित मोड़ थी, बल्कि कूटनीतिक लिहाज से भी बड़ी चर्चा में रही। लेकिन अब, एक दशक बाद, भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं। हाल ही में जब पीएम मोदी पेरिस जाते हुए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र से गुजरे, तो उन्होंने कोई औपचारिक संदेश तक नहीं दिया, जिससे दोनों देशों के शीत युद्ध जैसे रिश्ते साफ नजर आए। दूसरी ओर, पाकिस्तान अमेरिका से आर्थिक मदद के लिए जूझ रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा विदेशी सहायता कार्यक्रमों पर 90 दिनों की रोक ने पाकिस्तान को झटका दिया है, जिससे उसकी यूएसएआईडी आधारित परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। आईएमएफ की शर्तों और बढ़ती बेरोजगारी के बीच पाकिस्तान को कूटनीतिक मोर्चे पर कड़ी मशक्कत करनी होगी। इसके अलावा, अफगानिस्तान पर ट्रंप का फोकस और इमरान खान की रिहाई का मुद्दा पाकिस्तान की राजनीति और विदेश नीति को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है।