New Delhi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संयुक्त प्रेस वार्ता में कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की घोषणा की गई। दोनों नेताओं ने पाकिस्तान से मांग की कि वह अपनी भूमि का उपयोग सीमा-पार आतंकवादी हमलों के लिए न होने दे। इस बयान के बाद पाकिस्तान बौखला गया और उसके विदेश मंत्रालय ने इसे “एकतरफा और भ्रामक” करार दिया। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने 26/11 हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की मंजूरी दी, जिसे पीएम मोदी ने बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया। साथ ही, अमेरिका ने पाकिस्तान की परियोजनाओं के लिए 845 मिलियन डॉलर की फंडिंग निलंबित कर दी, जिससे पाकिस्तान को और झटका लगा है।
ट्रंप की पारस्परिक टैरिफ नीति से भारत पर पड़ सकता है बड़ा असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सभी व्यापारिक साझेदारों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने की घोषणा से वैश्विक व्यापार में चिंता बढ़ गई है। ट्रंप का दावा है कि इस कदम से अमेरिका में नौकरियों का सृजन होगा और व्यापार असंतुलन दूर होगा। भारत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि वर्तमान में भारत अमेरिकी उत्पादों पर औसतन 9.5% टैरिफ लगाता है, जबकि अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर केवल 3% टैरिफ लगाता है। अगर अमेरिका जवाबी टैरिफ लागू करता है, तो भारतीय वस्तुओं के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है। खाद्य उत्पाद, कपड़ा, आभूषण, फार्मा और इस्पात जैसे उद्योग सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। भारत व्यापार तनाव कम करने के लिए 30 से अधिक अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने और अमेरिकी रक्षा व ऊर्जा वस्तुओं के आयात को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। यदि ट्रंप की नीति लागू होती है, तो भारत, जापान और यूरोपीय संघ पर सबसे अधिक असर पड़ेगा। इससे वैश्विक व्यापार संतुलन और अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।