New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक और कार्यस्थलों पर स्तनपान को कलंक नहीं माना जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सार्वजनिक भवनों में स्तनपान और बाल देखभाल कक्ष बनाने के निर्देश दिए। जस्टिस बीवी नागरत्ना और पीबी वराले की पीठ ने कहा कि स्तनपान का अधिकार मां और बच्चे के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा है। संविधान के अनुच्छेद 21 और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत सरकार का दायित्व है कि वह माताओं को अपने बच्चों को स्तनपान कराने की सुविधाएं सुनिश्चित करे। अदालत ने कहा कि शिशु का स्वास्थ्य केवल एक व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि देश के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ा हुआ है। पीठ ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और श्रम मंत्रालय की 27 फरवरी 2024 की एडवाइजरी को संविधान के अनुच्छेद 14 और 15(3) के अनुरूप बताया। इस एडवाइजरी में सार्वजनिक भवनों में फीडिंग रूम और 50 से अधिक महिला कर्मचारियों वाले स्थानों पर क्रेच अनिवार्य करने की बात कही गई है सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सार्वजनिक स्थानों पर इन सुविधाओं को जल्द लागू करने का निर्देश दिया ताकि माताओं और शिशुओं को अनुकूल माहौल मिल सके।