उत्तर प्रदेश : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि दहेज प्रताड़ना कानून का इस्तेमाल पति के रिश्तेदारों को अनावश्यक रूप से तंग करने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि जब तक किसी रिश्तेदार की प्रथम दृष्टया विशिष्ट भूमिका सामने न आए, तब तक उन्हें ट्रायल कार्यवाही में नहीं घसीटा जा सकता। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की अदालत ने अलीगढ़ के सुनील कुमार और तीन अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए ननद-ननदोई को जारी सम्मन और पुनरीक्षण अर्जी निरस्त करने के दोनों आदेश रद्द कर दिए। अदालत ने कहा कि याचियों के खिलाफ आरोप सामान्य प्रकृति के हैं और ऐसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं जिनके आधार पर सजा दी जा सके। मामला अलीगढ़ के इगलास थाना क्षेत्र का है, जहां शादी के बाद दहेज उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। ट्रायल कोर्ट और पुनरीक्षण अदालत ने याचियों के खिलाफ सम्मन जारी किए थे, जिसे हाईकोर्ट ने विधिक त्रुटि बताते हुए खारिज कर दिया।