निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाला मनुष्य का जन्म और मरण सुधार जाता है

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greater noida : कस्बे में श्री राधा कृष्ण प्रचार मंडल के नेतृत्व में चल रही 26 वें वार्षिकोत्सव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथा व्यास आचार्य श्री अतुल कृष्ण जी महाराज ने कहा कि मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध श्री भागवत जी सुनकर ही होता है। विडंबना ये है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं

महाराज जी ने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है। जबकि शरीर नश्वर है। उन्होंने कहा कि भागवत बताता है कि कर्म ऐसा करो जो निस्काम हो वहीं सच्ची भक्ति है।

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