Prayagraj : महाकुंभ ने पूरी दुनिया में अपनी भव्यता और महत्व से ध्यान आकर्षित किया है। प्रयागराज में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर आयोजित इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने प्रमुखता से कवर किया है। इसे “मानवता का सबसे बड़ा जमावड़ा” और “त्योहारों का त्योहार” कहा जा रहा है।महाकुंभ की भव्यता ने द न्यूयॉर्क टाइम्स, बीबीसी, द गार्डियन, सीएनएन, और वाशिंगटन पोस्ट जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों का ध्यान खींचा है। पाकिस्तान की मीडिया ने भी इसे प्रमुखता दी है। महाकुंभ को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में मिली जगह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर की व्यापक मान्यता को दर्शाती है।
13 जनवरी से महाकुंभ की शुरुआत हो चुकी है। अब तक 8 करोड़ से ज्यादा लोग संगम स्नान करने पहुंच चुके हैं। देश दुनिया के कोने-कोने से लोग आस्था की डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं। इसी बीच खबरें आ रहीं हैं कि राहुल गांधी और प्रियंका भी महाकुंभ में पुण्य की डुबकी लगाने पहुंच सकते हैं। इन दोनों का ये दौरा काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका वाड्रा महाकुंभ 2025 में प्रयागराज पहुंच सकते हैं। चर्चा है कि राहुल-प्रियंका का फरवरी माह में महाकुंभ में पहुंचना संभावित है। राहुल गांधी और प्रियंका महाकुंभ मेला क्षेत्र में लगे सेवादल के शिविर का भ्रमण करने भी जाएंगे।
✒️ *महाकुंभ में उद्योगों की हुई दिवाली, हर जिले पर बरस रहीं लक्ष्मी, जमकर हो रहा कारोबार*
धार्मिक आयोजन कैसे किसी प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनते हैं, इसका साक्षात प्रमाण है प्रयागराज महाकुंभ। लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार महाकुंभ में सभी 75 जिलों के कारीगरों से लेकर उद्यमी तक प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े हैं। सिर्फ 45 दिन में 35 देशों के बराबर आबादी आकर्षित करने वाला यह महा आयोजन उद्योगों के लिए दिवाली से कम नहीं है। अकेले 10 हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर छोटे कारीगरों और छोटी इकाइयों के पास हैं। महाकुंभ में राज्य सरकार का 7,500 करोड़ रुपये का बजट है। इस खर्च से करीब 25 हजार करोड़ रुपये के राजस्व और दो लाख करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। महाकुंभ ने जूता-चप्पल सिलने वाले कारीगर से लेकर हेलीकॉप्टर चलाने वाली कंपनी तक के लिए कमाई के रास्ते खोले हैं।
✒️ *स्वामी शिवानंद: महाकुंभ में सबसे उम्रदराज संत*
महाकुंभ में 125 वर्ष की आयु के स्वामी शिवानंद, जो पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हैं, अपने तप, साधना और ज्ञान से श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रहे हैं। स्वामी शिवानंद का आश्रम काशी के कबीर नगर में स्थित है और वह पिछले 100 वर्षों से कुम्भ और अर्द्धकुम्भ में भाग लेते आ रहे हैं। उनकी दिनचर्या में प्रात: 3 बजे उठकर योग, जप और पाठ करना शामिल है, और वे केवल उबली हुई सब्जी, दाल-चावल, रोटी ही खाते हैं।और जहां कहीं जाते हैं उनका रसोइयां साथ ही चलता है। चार साल की उम्र में संत ओमकारानंद गोस्वामी का सानिध्य मिला गया। जब वह मात्र छह साल के ही थे तो माता-पिता और बहन का साया उठ गया।