New Delhi : भारत तिलहन उत्पादन में विश्व में पांचवें स्थान पर है, लेकिन बढ़ती जनसंख्या और आय के कारण मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। वर्ष 1950-60 में प्रति व्यक्ति खाद्य तेल की खपत 2.9 किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 20 किलोग्राम प्रति वर्ष हो गई है। सबसे ज्यादा सरसों तेल की खपत होती है, उसके बाद सोयाबीन और सूरजमुखी का स्थान है। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत पाम आयल और अन्य तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उन्नत बीज और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है। अगले छह वर्षों में इस मिशन पर 10,103 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।