आस्था बनाम सियासत, महाकुंभ में स्वच्छता जागरूकता आयोजन

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Prayagraj : प्रयागराज में चल रहा महाकुंभ अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। करीब 58 करोड़ श्रद्धालुओं ने इसमें डुबकी लगाई, लेकिन इसके साथ सियासत भी तेज हो गई। हाल ही में ममता बनर्जी के बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिस पर कई वरिष्ठ पत्रकारों ने “खबरों के खिलाड़ी” कार्यक्रम में चर्चा की। समीर चौगांवकर – ममता बनर्जी का बयान उनकी राजनीति का हिस्सा है। उन्होंने अपने वोट बैंक को साधने के लिए ऐसा कहा। विनोद अग्निहोत्री – कुंभ हर 12 साल में होता है, लेकिन इस बार इसे राजनीतिक औजार बनाया गया। ममता को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था। अवधेश कुमार – कुंभ के दौरान हुई भगदड़ प्रशासन की नाकामी थी, लेकिन इसे पूरी तरह कुंभ से जोड़ना सही नहीं है। राकेश शुक्ल – विपक्ष को सवाल उठाने का हक है, लेकिन सवाल एकतरफा नहीं होने चाहिए। पूर्णिमा त्रिपाठी – कुंभ पर राजनीति हर सरकार ने की है। लेकिन प्रशासन को सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं पर भी ध्यान देना चाहिए। रामकृपाल सिंह – ममता बनर्जी का बयान हताशा का परिणाम है। उनका वोट बैंक खिसकने का डर उन्हें ऐसा कहने पर मजबूर कर रहा है। महाकुंभ आस्था का विषय है, लेकिन इस बार यह राजनीति का केंद्र बिंदु बन गया है। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन शिविर में एक स्वच्छता कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं को स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन परमार्थ निकेतन, ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस और डेटॉल ‘बनेगा स्वस्थ इंडिया’ के सहयोग से किया गया। स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से महाकुंभ के दौरान स्वच्छता बनाए रखने की अपील की और कहा कि स्वच्छता केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए भी अनिवार्य है। मुख्य बिंदु: स्वच्छता को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी गई। ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस और डेटॉल द्वारा प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं के बीच डेटॉल साबुन वितरित किए गए, लेकिन उन्हें नदियों में स्नान के दौरान साबुन का उपयोग न करने की सलाह दी गई।पर्यावरण संरक्षण, जल पुनर्चक्रण और कचरा प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। कार्यशाला के अंत में श्रद्धालुओं ने ‘बनेगा स्वस्थ इंडिया’ के संकल्प को लेकर शपथ ली कि वे न केवल स्वयं स्वच्छता का पालन करेंगे, बल्कि दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।परमार्थ निकेतन आश्रम की इस पहल से महाकुंभ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को स्वच्छता के महत्व का अहसास हो रहा है, जिससे ‘स्वच्छ मेला, स्वस्थ हम’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

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